आपकी मुस्कान बहुत सी परेशानियों का हल है। आप अगर लड़ते-लड़ते मुस्कुरा दें तो लड़ाई खत्म। परेशानी के मुश्किल दौर में आप किसी की ओर देखकर प्यारी सी मुस्कान दे दें तो परेशानी खत्म। मुस्कान भले किसी मुसीबत का हल नहीं पर उससे निबटने की ताकत जरूर देता है। जब आपकी छोटी सी मुस्कान इतने काम की है तो यह किसी को इंप्रेस करने में भला कैसे पीछे रह सकती है। जब भी उनसे मिलें एक प्यारी सी मुस्कान दें यह आपके रिश्ते को मजबूत देगा. अब आपकी जिंदगी में कोई आ गया है या फिर आप किसी को अपनी जिंदगी में लाना चाहती हैं तो सबसे पहले अपने लुक्स में थोड़ा सा बदलाव करें। अपने आप का नया वर्जन सबके सामने पेश करें, मतलब खुद का मेकओवर करें। अपने ड्रेसिंग में थोड़ा बदलाव करें, आपके चेहरे को जंचता हुआ हेयरस्टाइल लें और अपने आपको एक स्टैंडर्ड लुक दें। यह बात तो कई स्टडीज में उजागर हो चुकी है कि मर्द सबसे पहले महिलाओं के स्तनों की तरफ देखते हैं या फिर यूं कहें कि महिला के स्तन ही मर्दों को सबसे पहले अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ऐसे में थोड़ा डीपनेक टॉप्स पहनना शुरू करें लेकिन ध्यान रहे कि वो ज्यादा डीपनेक न हों। अपने शरीर के उभार को एलीगेंट तरीके से शोऑफ करें ताकि वो आपके लिए एक स्टेटमेंट बन जाए।
Wednesday, 28 September 2016
Friday, 23 September 2016
गर्भवती महिलाओं में खून की कमी के मामले घटे !
एक दशक बाद साल 2015 में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। लेकिन यह भी सच्चाई है कि अन्य देशों की अपेक्षा और वैश्विक औसत दर की तुलना में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या भारत में ज्यादा है। साल 2015-16 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के लिए 14 राज्यों के सर्वे दर्शाते हैं कि एक दशक पहले रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या 57 प्रतिशत थी, जो घटकर 45 प्रतिशत हो गई।इंडिया स्पेंड विश्लेषण के एनएफएचएस-4 आंकड़े के अनुसार, रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं (15 से 49 वर्ष) की संख्या में कमी का संबंध स्वच्छता और महिलाओं की शिक्षा में सुधार से है। रक्तहीनता से पीड़ित महिला के मरने या उनके द्वारा सामान्य से कम वजन के बच्चे को जन्म देने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही नवजात शिशु की मृत्यु की आशंका भी बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2011 में भारत में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाएं 54 प्रतिशत थीं। इस मामले में भारत की स्थिति पाकिस्तान (50 प्रतिशत), बांग्लादेश (48 प्रतिशत), नेपाल (44 प्रतिशत), थाईलैंड (30 प्रतिशत), ईरान (26 प्रतिशत), श्रीलंका (25 प्रतिशत) से भी बदतर थी। ये आंकड़े सुझाते हैं कि साल 2015 में पड़ोसी देशों, सापेक्षिक रूप से गरीब देशों की तुलना में भी भारत की स्थिति खराब थी। 14 राज्यों में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या में सर्वाधिक कमी पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में देखी गई जो 39 प्रतिशत थी। इस राज्य में अब ऐसी महिलाएं सिर्फ 24 प्रतिशत हैं। बेहतर स्वच्छता के उपयोग मामले भी सिक्किम साल 2014-15 में देश में तीसरे स्थान पर था। बताया जाता है कि साल 2005-06 से 2014-15 के दौरान महिला साक्षरता में वृद्धि के मामले में भी सिक्किम दूसरे स्थान पर था। एनएफएचएस-4 के आंकड़ों के अनुसार, रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं का सबसे अधिक अनुपात 58 प्रतिशत पूर्वी राज्य बिहार में था, जहां सबसे कम महिला साक्षरता दर है और बेहतर स्वच्छता का उपयोग भी सबसे कम होता है। बिहार में एक दशक के दौरान रक्तहीन, गर्भवती महिलाओं की संख्या में केवल दो प्रतिशत की ही कमी हुई। साल 2005 में इस मामले में बिहार से उपर केवल पांच राज्य थे। रक्तहीन गर्भवती महिलाओं की संख्या के मामले में बिहार के बाद मध्य प्रदेश और हरियाणा दोनों 55 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं। दूसरी ओर सिक्किम के बाद मणिपुर (26 प्रतिशत) और गोवा (27 प्रतिशत) का स्थान आता है। बिहार में 25 प्रतिशत परिवार ही बेहतर स्वच्छता का उपयोग करते हैं। इस मामले में विगत एक दशक में बिहार में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन यह सभी राज्यों की तुलना में सबसे कम है। 14 राज्यों में इस मामले में औसत वृद्धि दर 20 प्रतिशत थी। बिहार के बाद मध्य प्रदेश का स्थान है जहां 34 प्रतिशत परिवार बेहतर स्वच्छता का उपयोग कर रहे हैं और बेहतर स्वच्छता के उपयोग करने वाले 48 प्रतिशत परिवारों के साथ असम बदतर राज्यों की सूची में तीसरे स्थान पर है। जबकि सिक्किम में 88 प्रतिशत परिवार बेहतर स्वच्छता का उपयोग करते हैं। इस मामले में हरियाणा में सर्वाधिक 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देश में महिला साक्षरता दर 76 प्रतिशत है और 14 राज्यों में सर्वे के दौरान पाया गया कि विगत एक दशक में इन राज्यों में महिला साक्षरता दर में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई.बिहार में महिला साक्षरता दर 50 प्रतिशत है और एक दशक में इस दर वहां 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मध्य प्रदेश में महिला साक्षरता दर 59 प्रतिशत है और एक दशक में इस दर में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो हरियाणा के साथ सबसे बड़ी वृद्धि है। उधर, अब गोवा में महिला साक्षरता दर 89 प्रतिशत है और इसके बाद सिक्किम (87 प्रतिशत) और मणिपुर (85 प्रतिशत) का स्थान आता है।भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अतिथि शोधकर्ता डायने कोफे के अनुसार, परिवार में अपने लिए खड़ा होने में शिक्षा महिलाओं को मदद कर सकती है। वह गर्भावस्था के दौरान अच्छे भोजन की मांग कर सकती हैं, जिससे रक्तहीनता कमी दूर होगी।
Thursday, 22 September 2016
दही के इन गुणों को जानें
आप अपने खाने में दही का सेवन तो करते ही होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दही हमारे के लिए कितनी लाभकारी है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो हमें सुंदर, ताकतवर और रोग मुक्त बनाता है. दही खाने से पेट की गर्मी दूर होती है. दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है. पेट में गड़बड़ होने पर दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने या चावल में दही मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं. पेट के अन्य रोगों में दही को सेंधा नमक के साथ लेना फायदेमंद होता है. अमेरिकी आहार विशेषज्ञों के अनुसार दही का नियमित सेवन करने से आंतों के रोग और पेट संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं. दही में दिल के रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की गजब की क्षमता है. यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखता है.
दही का नियमित सेवन शरीर के लिए अमृत के समान माना गया है. यह खून की कमी और कमजोरी दूर करता है। दूध जब दही का रूप ले लेता है. तब उसकी शर्करा अम्ल में बदल जाती है. इससे पाचन में मदद मिलती है. जिन लोगों को भूख कम लगती है. उन लोगों को दही बहुत फायदा करता है. बवासीर रोग से पीड़ित रोगियों को दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीने से फायदा मिलता है. हींग का छौंक लगाकर दही खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है. दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है. यह हड्डियों के विकास में सहायक होता है. साथ ही, दांतों और नाखूनों को भी मजबूत बनाता है. इससे मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में मदद मिलती है.
Monday, 19 September 2016
चोकर नेकलेस बना लड़कियों की पहली पसंद
गर्ल्स सबसे अलग लगने के लिए आजकल तरह-तरह की एक्सेसरी को अपने स्टाइल में शामिल कर रही हैं. इस सीजन में चोकर नेकलेस ट्रेंड में हैं. बॉलीवुड से लेकर आम लड़कियों तक चोकर नेकलेस पहली पसंद बनता जा रहा है. हाल ही में दीपिका पादुकोण, ईशा गुप्ता, अमृता राव को रैंप शो और इंस्ट्राग्राम पर इस चोकर नेकलेस में देखा गया. चोकर नेकलेस 70 के दशक में काफी फैशन में था. चोकर से आपकी सुंदरता दो गुना और बढ़ जाती है.
चोकर को आप हर ड्रेस के साथ टीमअप कर सकती हैं. 200 रुपए से लेकर लाखों के डायमंड चोकर मार्केट में अवेलेबल हैं. ये नेकलेस किसी भी ड्रेस के साथ पहना जा सकता है, और हर ड्रेस के साथ खुब फबता भी है. सबसे खास कि इसे पहनकर साधारण साड़ी को भी हॉट बनाया जा सकता है. सलवार के साथ भी पहन सकती हैं. यदि फंक्शन में आप प्लेन शिफॉन साड़ी के साथ कलरफुल चोकर पहनेंगी, तो पार्टी में चार चांद लग जाएगा. इसलिए चोकर नेकलेस को अपनी एक्सेसरी में शामिल करें, और अपने नए स्टाइल से सभी को चौंका दें.
घर पर ही निखारें अपनी त्वचा
जरूरी नहीं है कि सुंदर त्वचा चाहिए तो आपको पार्लर ही जाना पड़ेगा. आप घर पर भी सुंदर और मुलायम त्वचा पा सकते हैं. अगर आप ही इन कुछ उपायों को घर पर ही कर लें तो आप भी आसानी से सुंदर दिख सकती हैं.
- पुदीने की कुछ पत्तियों को पानी में पीसकर सोने से पहले रोज रात में लगाएं.
- रात को आंखों को धोकर सोने के समय आंखों में गुलाब जल डालें इससे आप नींद का पूरा फायदा उठा पायेंगी और आपकी आंखों में चमक हमेशा बनी रहेगी.
- स्किन के अनुसार आप घरेलू पैक बनाएं जैसे- 4-5 स्ट्राबेरी को कद्दूकस करके एक बडे चम्मच स्टार्च के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं, इससे शुष्क स्किन में जान आ जाएगी.
- नींबू के छिलके को आप नाखूनों को अच्छे से साफ कर सकती हैं.
- एक बडे चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक बडा चम्मच पुदीने का चूर्ण व दही मिलाकर अच्छी तरह से फेंट लें फिर इसे आधे घण्टे के लिए रख दें और 15 मिनट तक चेहरे पर लगाए रखें. सूखने के बाद हल्के गर्म पानी से धो लें। सूखी स्किन को राहत मिलेगी.
- दो चम्मच मुलतानी मिट्टी, एक चम्मच कच्चा दूध, एक चम्मच गुलाबजल तथा एक चम्मच नारियल का पानी- इन सबको मिलाकर सांवली गर्दन पर लगाएं। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से साफ कर लें.
- स्किन की खूबसूरती के लिए विटामिनए तथा सी युक्त डाइट लें.
ग्रीन टी को दिनचर्या में जरूर करें शामिल
अगर एक्सरसाइज और वर्कआउट से भी आपका वजन कम नहीं हो रहा है. तो ग्रीन टी आपके लिए एक बेहतर उपाय है. यहां तक की आजकल लोगों के जीवन में ऐसे कई कारण हैं जिससे तनाव हो ही जाता है. लेकिन इसे अनदेखा करना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को पैदा कर सकता है. इसलिए तनाव को कम करना बहुत जरूरी है. एक नए शोध के अनुसार तनाव के स्तर को कम करने में ग्रीन टी आपके लिए मददगार हो सकती है.
अगर आप सिगरेट पीने की लत से छुटकारा चाहते हैं तो भी आपको ग्रीन टी पीजिए. एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार ग्रीन टी में मौजूद तत्व निकोटीन की लत छुड़ाने में मदद करते हैं. चीन की पत्रिका साइंस चाइना लाइफ में ए रेवोल्यूशनरी अप्रोज फॉर दे सिसेशन ऑफ स्मोकिंग शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने निकोटीन की तलब को शांत करने के लिए ग्रीन टी के तत्वों को मिलाकर एक सिगरेट का निर्माण किया.
कैंसर का खतरा भी होता है कम
ग्रीन टी में बहुत से औषधीय गुण होते हैं और यह बहुत से एशियन समुदायों में पीढ़ियों से जानी जाती है. हाल में ऐसा पता चला है कि ग्रीन टी का सेवन करने से कैंसर जैसी भयावह बीमारी से भी बचा जा सकता है. पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खाद्य वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीन टी में पाया जाने वाला एक तत्व ऐसी प्रक्रिया को शुरू करने में सक्षम है जो स्वस्थ कोशिकाओं को छोड़कर कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारती है. ग्रीन टी में पाये जाने वाले एपिगैलोकेटचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी) में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने की क्षमता होती है.
ज्यादा से सेवन से हो सकता है नुकसान
ज्यादातर लोग ग्रीन टी को सेहत के लिहाज से काफी फायदेमंद मानते हैं.इसलिए वे दिन भर में कई बार ग्रीन टी की चुस्कियां लेते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं ग्रीन टी का ज्यादा सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है. कई बार अच्छी चीजों को ज्यादा सेवन सेहत बिगाड़ सकता है. दिन भर में पांच से छह कप ग्रीन टी का सेवन परेशानियों को कारण बन सकता है. ग्रीन टी में कैफीन होता है इसलिए इसे ज्यादा पीने से स्लीपींग डिस्आडर्र की समस्या हो सकती है. ग्रीन टी वजन कम करने में सहायक मानी जाती है इसलिए लोगों को लगता है कि ग्रीन टी के ज्यादा पीने से उनका वजन जल्द से जल्द कम हो जाएगा जो कि पूरी तरह से गलत है.
ब्रेकफास्ट में इन चीजों से लें ब्रेक
वैसे तो कहा जाता है कि सुबह का नाश्ता भर पेट करना चाहिए, ये सच भी है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप पेट भरने के लिए कुछ भी खा लें. नाश्ते में हमें हेल्दी चीजों का ही सेवन करना चाहिए. हम अपनी इस रिपोर्ट में आपको बता रहे हैं कि आपको किन चीजों से नाश्ते में बचना चाहिए क्योंकि ये चीजें आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं.
ब्रेड बटर- ये जल्दी बनने वाला ब्रेकफास्ट है। जो पांच मिनट में तैयार हो जाता है, लेकिन बटर में नमक की अधिक मात्रा होती है जो हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता।
मैग्गी- 10 मिनट में बनने वाली मैग्गी अस्वस्थ फूड है। सुबह नाश्ते में मैग्गी स्वास्थय पर बुरा प्रभाव डालती है। इसमें कोई भी नेचुरल चीज नहीं डली होती।
कचौरी- कचौरी सुबह नाश्ते में खानी नहीं चाहिए। तेल में तली कचौरी और इसमें मसाला भी भरा जाता है, जो सेहत के लिए सही नहीं होता।
वड़ा पाव- वड़ा पाव मुंबई का फेमस फास्टफूड है। वड़ा पाव को लोग नाश्ते में खाना पसंद करते हैं, जो स्वास्थ्य पर असर डालता है।
पराठा- पराठ नॉर्थ इंडियन फेमस फूड है। जो लोग सुबह के समय दही के साथ पराठा खाना पसंद करते हैं। फैट को बढ़ाता है, जो शरीर के लिए सही नहीं होता।
साबूदाना वड़ा- ये भारतीय लोगो के बीच बहुत किया जाता है, तेल में तले साबूदाना वड़ा सुबह ब्रेकफास्ट में खाना शरीर को हानि पहुंचाता है।
सेहत के लिए बहुत लाभकारी है शकरकंद
शकरकंद हमारी सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी है. इसमें अनेक विटामिन रहते हैं विटामिन ए और सी की मात्रा काफी अधिक होती है. शकरकंद हमारे शरीर को कई खतरनाक रोगों से बचाता है.
- शकरकंद को भूनकर या उबाल कर खाने से आंखों की रोशनी बढती है. शकरकंदी में विटामिन बी6 होता है जो हार्ट अटैक से बचाव करती है.
- शकरकंद त्वचा, नेत्र रोग, अस्थमा, थायरॉयड और मधुमेह के इलाज में में सहायक होता है.
- शकरकंद में अधिक मात्रा में फाइबर होता है जो कब्ज को दूर करता है और पाचनशक्ति को बढाता है.
- शकरकंद खाने से त्वचा में चमक आती है और चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पडती.
- शकरकंदी में कैरोटिनॉयड पाया जाता है, जो फेफडें और मुंह के कैंसर से बचाता है.
- शकरकंद-यह विटामिन ए का बहुत ही अच्छा स्त्रोत है और विटामिन ए एंटी रिंकल एजेंट है. साथ ही यह त्वचा को कोमल भी बनाता है.
आंखों की रोशनी के लिए जरूर खाएं ये चीजें
हमारी लाइफस्टाइल का हमारी आंखों पर बहुत प्रभाव पड़ता है. आज के समय में ज्यादातर लोगों को आंखों की शिकायत हो गई है. दिन के 8 से 10 घंटे हम कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठकर बिताते हैं. इसका नतीजा ये होता है कि हमारी आंखों को पूरा आराम नहीं मिल पाता है. एक ओर आंखों को रेस्ट नहीं मिलता और स्ट्रेस बना रहता है वहीं दूसरी ओर हमारी डाइट में भी ऐसा कुछ नहीं होता है जिससे आंखों को पोषण मिल सके.
हम आपकों बताएंगे कुछ ऐसी चीजें जिन्हे खाने से आपकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए बनी रहेगी.
- आंवला, आंखों के लिए वरदान है. इसमें मौजूद तत्व आंखों की रोशनी को सालों-साल तक बनाए रखते हैं. आप चाहें तो कच्चे आंवले को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा सुबह खाली पेट आंवले का रस पीना या फिर आंवले का मुरब्बा खाना भी फायदेमंद रहेगा.
- इलायची, शरीर के तापमान को संतुलित रखने का काम करती है. इसके नियमित सेवन से आंखों को ठंडक मिलती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है. आप चाहें तो इलायची और सौंफ को पीसकर पाउडर तैयार कर सकते हैं. इस पाउडर को ठंडे दूध में मिलाकर पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है.
- अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें. हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है, जो आंखों की हेल्थ के लिए बहुत ही जरूरी है.
- अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं. अखरोट में मौजूद विटामिन ई और फैटी एसिड्स आंखों की सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं. आंखों को लंबे समय तक हेल्दी रखने के लिए डाइट में अखरोट को शामिल करना न भूलें
- गाजर का जूस पीना सेहत के लिए तो अच्छा है ही साथ ही आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है. रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीने से आंखों पर चढ़ा चश्मा तक उतर सकता है.
- पानी में भीगे हुए बादाम खाने के बहुत से फायदे आपको पता होंगे लेकिन आपको शायद ही पता हो कि बादाम भिगोकर खाने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है.
जवान दिखने में मदद करेगा आंवला
आंवला बेहद ही लाभदायक है, आधुनिक संदर्भ में इसे बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट माना गया है. आंवला फल के सीधे सेवन के अलावा चूर्ण एवं स्वरस के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है. बढ़ती उम्र के प्रभावों को धीमा करने का अद्भुत गुण इसे ‘रसायन’ बनाता है. इसके निरंतर प्रयोग से बाल टूटना, रू सी, सफेद होना रूक जाते हैं. नेत्र ज्योति सुरक्षित रहती है. दांत मजबूत बने रहते हैं तथा नेत्र, हाथ पांव के तलुओं, मूत्रमार्ग, आमाशय, आंतों तथा मलमार्ग की जलन समाप्त हो जाती है. इसके प्रयोग से इम्युनिटी पावर सुरक्षित रहती है. बार-बार होने वाली बीमारियों से बचाव होता है. यह Vitamin C का सर्वोत्तम स्रोत है. इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा तथा कैल्शियम भी पाया जाता है. आंवले के रस में संतरे के रस की तुलना में 20 गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है. सुबह प्रतिदिन खाली पेट दो आंवला खाने या फिर रात में सोने से ठीक पहले एक चम्मच आंवले का चूर्ण एक घूंट पानी के साथ लेने का प्रभाव आप एक महीने में खुद महससू करेंगे. बालों से संबंधित व्याधियों में जैसे बालों का झड़ना, असमय सफेद होना, डेंड्रेफ आदि में इसके चूर्ण का अन्य जड़ी-बूटियों के साथ लेप बहुत उपयोगी है, साथ ही चूर्ण का सेवन भी इन रोगों में बहुत फायदेमंद है. भूख बढ़ाने के साथ आंवला पाचन शक्ति भी बढ़ाता है. हृदय के लिए अच्छा है. प्रजनन शक्ति बढ़ाने वाला है तथा त्वचा के रोगों का भी नाश करता है. बुखार का नाश करता है. मस्तिष्क दौर्बल्य को भी नष्ट करता है.
एड़ियों का भी रखें अच्छे से ख्याल
अगर आपको फटी एड़ियों से शर्मिदा होना पड़ता है तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे में नींबू का इस्तेमाल आपको इस परेशानी से निजात दिला सकता है। नींबू से पैरों की सुंदरता को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। आपको नींबू को लगाना नहीं है। बस उसकी स्लाइस को मोजे में रखकर सोना है। इसक लिए आपको बड़े साइज का नींबू लेना है, जिससे पूरी एड़ी कवर हो जाए।
इससे रात भर आपकी एड़ियां मॉश्चराइज होती रहेंगी और फटी एड़ियों की समस्या भी खत्म हो जाएगी। मोजे में नींबू को एक से दो घंटे भी रख सकते हैं। अच्छे रिजल्ट के लिए पूरी रात नींबू को पैरों में रखा रहने दें। पहले दिन से ही आपको फर्क दिखने लगेगा।
नींबू का रस केमिकल पीलिंग के तौर पर काम करता है, जो एड़ियों की फटी और ड्राई स्कीन हटा कर इन्हें कोमल और मुलायम बनाता है। ऐसे में आप इनसे एड़ियों को खूबसूरत बना सकते हैं।
Sunday, 18 September 2016
शिशुओं की जरा संभलकर करें देखभाल
नवजात बच्चों की देखभाल करना आसान नहीं होता है. कई ऐसी चीजें होती हैं जिनका हमे पता भी नहीं चलता और नवजात उसे बीमारी से जूझ रहे होते हैं. नवजात शिशुओं को भी छोटी-मोटी बीमारियों से जूझना पड़ता है. आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन नवजात बच्चों को भी गैस बनती है. बच्चे दुध पीते समय या रोते समय हवा भी गटकते रहते हैं.
जो बच्चे बोतल से दुध पीते हैं ज्यादा हवा गटकते हैं. और हवा उनकी आंतों तक चली जाती है. और अगर ये गैस रूक जाए तो बच्चे को परेशानी होती है. और वो रोने लगता है. बच्चों में त्वचा संबंधित भी कई बीमारियां होती हैं. जब बच्चे को नहलाया जाता है. तब उसकी त्वचा पर कई तरह के धब्बे और आकार दिखाई पड़ते हैं. इससे पता चलता है कि उनके रक्त का संचालन ठीक से नहीं हो रहा है.
शिशुओं की मुलायम त्वचा पर नीले निशान अधिकतर त्वचा के नीचे या कमर के ऊपर दिखाई पड़ते हैं. कुछ बच्चों की नाक के ऊपर छोटे-छोटे दाने होते हैं ये त्वचा के तैलीय होने के कारण बताते हैं. लेकिन ये कोई गंभीर बात नहीं है अगर इसका इलाज ना भी कराया जाए तो ये कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं.
नए जन्मे हुए बच्चे को साबुन से नहीं नहलाना चाहिए. और ना ही शैंपू का इस्तेमाल करना चाहिए. बच्चों की देखभाल बहुत ही सहजता से करनी चाहिए. और कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.
अंगूठा चूसने वाले बच्चों में कम होती है एलर्जी
अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि जिन बच्चों में इन दोनों बुरी आदतों की आदत है, तो उन्हे कई तरह की एलर्जी होने की संभावना कम हो जाती है. अध्ययन के मुताबिक, जीवन के शुरूआती पड़ाव में धूल या कीटाणओं से संपर्क होने का खतरा कम रहता है. हालांकि, इन दोनों से थोड़ा फायदा होता है. तो जरूरी नहीं है कि बच्चों को इन आदतों के प्रोत्साहित किया जाए. इस अध्ययन को पीडियाट्रिक्स पत्रिका में प्रकाशित किया गया था.
याददाश्त के लिए लीजिए भूमध्य आहार
भूमध्य आहार याददाश्त के लिए काफी कारगर माना गया है. एक नए अध्ययन में पता चला है कि भूमध्य देशों का आहार आपकी संज्ञानात्मक कार्यविधि को सुधारने के साथ ही अल्जाइमर घटाने और हृदय संबंधी समस्याओं में भी सुधार लाने में कारगर है. भूमध्य आहार में पत्तेदार साग, ताजे फल और सब्जियां, सेम, बीज, आनाज, नट और फलियां जैसे मुख्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं. मेडडाइट में दूध कम मात्रा में है. रेड मीट का कम से कम इस्तेमाल है और जैतून का तेल वसा के प्रमुख स्रोत के तौर पर इस्तेमाल होता है. यह अध्ययन पत्रिका ‘फ्रंटियर्स न्यूट्रीशन’ में प्रकाशित हुआ है, जिसमें शोधकर्ताओं ने जांच में पाया कि मेडडाइट कैसे हमारी संज्ञानात्मक प्रक्रिया को प्रभावित करती है. स्वाइनबुर्ने विश्वविद्यालय में शोधकर्ता हर्डमान राय ने कहा, “सबसे आश्चर्यजनक परिणाम यह है कि संसार के सभी देशों में इसके सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं.” अध्ययन में पता चला कि मेडडाइट के सकारात्मक प्रभाव से ध्यान, भाषा और विशेषकर याददाश्त, जिसमें पहचान में देरी जैसी समस्या से निपटने में मददगार साबित हुई. मेडडाइट से गुस्सैल प्रतिक्रियाओं में सुधार, सूक्ष्म पोषक तत्वों में वृद्धि, विटामिन और खनिज तत्वों के असंतुलन में सुधार और आहार के मुख्य वसा के स्रोत के तौर पर जैतून के तेल के इस्तेमाल से लिपिड के प्रोफाइल में बदलाव और जोखिम कारकों में बदलाव का अवसर मिलता हैं. इसके साथ मेडडाइट से वजन को एक समान बनाए रखने, मोटापा घटाने की क्षमता और रक्त में पॉलीफिनाइल की मात्रा में सुधार करने के साथ ही कोशिकीय उपापचय ऊर्जा में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला.
लंबे लड़के होते हैं लड़कियों की पहली पसंद
लड़कियां ज्यादातर चाहती हैं कि उनका हमसफर टॉल डार्क एंड हैंडसम हो, लंबे लड़के लड़कियों को ज्यादा पसंद आते हैं. साउथ कोरिया के एक विश्वविद्यालय में की गयी खोज से यह पता चला है कि जिन रिलेशन में लम्बाई का गैप होता है वो रिश्ते ज्यादा खुशहाल रहते हैं. जबकि इस स्टडी से चौकाने वाली कोई बात नहीं है. क्योंकि आपने ज्यादातर देखा होगा कि महिलाओं कि पहली पसंद लम्बे पुरुष होते हैं. यह लगभग 50 फीसदी सही बात है कि महिलाएं लंबे पुरुषों को डेट करती हैं. महिलाओं से जब यही बात पूछा गया तो उन्होंने बताया कि छोटे कद के मुकाबले लंबे कद वाले पुरुष ज्यादा ताकतवर होते हैं. बल्कि इंटेलीजेंट भी होते हैं. इस बात का मतलब यह है कि लंबे पुरुष छोटे पुरुषों की तुलना में ज्यादा आत्मविश्वास से भरे रहते हैं. लंबे पुरुष महिलाओं को शारीरिक सुरक्षा का एहसास देते हैं. जबकि छोटी हाइट वाले पुरुष महिलाओं को सुरक्षा का एहसास नहीं करा पाते. यही कारण है कि महिलाएं ऐसे पुरुषों की तलाश करती हैं जिनके साथ उन्हें सुरक्षा का एहसास होता है. उन्होंने ये भी बताया कि लंबे पुरुष ज्यादातर दूसरों पर अपना वर्चस्व बनाए रखने में सफल होते हैं. ऐसा उनके आत्मविश्वास के कारण होता है. महिलाओं को उनका यही स्वभाव और रसूख बहुत पसंद आता है. लंबे पुरुष अकसर फिट दिखते हैं. यही कारण है कि महिलाएं लंबे पुरुषों के साथ रहते हुए अपनी भी फिटनेस का पूरा ख्याल रखती है.
लड़कियां ज्यादातर तलाशती हैं अमीर हमसफर
ऐसा कहा जाता है कि लड़कियां हमेशा अमीर हमसफर तलाशती हैं. जिससे वो अपनी आने वाली जिंदगी ऐश और आराम से जी सकें. इसलिए वह एक ऐसे पार्टनर की तलाश करती हैं जो पैसे वाला हो और उनकी जिंदगी व्यविस्थत हो. कई बार ऐसा सोचना ठीक होता है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लड़कियां ज्यादा दिन तक रिश्ता नहीं संभाल सकती. अगर आपकी पार्टनर भी आपसे ज्यादा आपके पैसों से प्यार करती है तो जान लें ये कुछ जरूरी बातें… कई बार फाइनेंशियली मजबूत होने के लिए भी लड़कियां अमीर लड़कों से शादी करना चाहती हैं फिर चाहे लड़का कम पढ़ा लिखा ही क्यों न हो. अपने भविष्य को सुरक्षित और सुखी बनाने की सोच रखने वाली लड़कियों को पता होता है कि अगर वह किसी अमीर घर में जाएंगी तो संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उनका होगा.
अपने दिल का दिल से रखें ख्याल
हमारा दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. जब हम अपने मन का काम पूरे दिल से करते हैं. तो फिर अपने दिल का ख्याल भी तो दिल से रख सकते हैं. मौसमी फल, सब्जियों और प्राकृतिक आहार का सेवन दिल को दुरुस्त और शरीर को स्वस्थ रखने का सर्वोत्तम उपाय है.
हमें रात में हल्का और सीमित मात्रा में खाना चाहिए. और ये ही हमारे सेहत का मंत्र भी कहा जा सकता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, बीटा कैरोटीन और विटामीन ई वाले स्पलीमेंट्स चाहे अलग-अलग लिए जाएं या एक-दूसरे के साथ या फिर दूसरे एंटीऑक्सीडेंट विटामिन का सेवन करने से दिल के रोगों से बचाव नहीं होता.
विटामिन डी की हर रोज 400 यूनिट की हाई डोज बीमारी को बढ़ाने का कारण बन सकती है . साथ ही हमें ये भी ख्याल रखना चाहिए कि बेटा कैरोटीन सप्लीमेंट्स खतरनाक होते हैं.
अगर हम लंबा जीवन चाहते हैं, और ये जीवन अच्छी सेहत के साथ खुशहाली से जीना चाहते हैं तो हमें अपने दिल का पूरा ख्याल रखना होगा.
नीम का तेल करे सौंदर्य की देखभाल
आपने नीम के कई गुणों के बारे में सुना होगा, जिनमें रूखे बालों और मुहांसों से इलाज से लेकर शरीर में जीवाणुओं के प्रभाव को कम कने का उपचार भी शामिल है। नीम से प्राप्त तेल आपको सौन्दर्य भी प्रदान करता है। यह प्राकृतिक तत्व कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने में हमारी सहायता करता है और त्वचा को अन्दर से शुद्ध बनाता है। नीम के अंश का प्रयोग कई सौन्दर्य उत्पादों में भी महिलाओं को प्राकृतिक रूप से सुन्दरता प्रदान करने के लिए किया जाता है। नीम में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल तथा जलनरोधी गुण होते हैं जो संक्रमण को दूर करते हैं तथा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को काफी मजबूत बनाते हैं। यह एक प्राकृतिक उत्पाद है जिसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं और ऐसा कोई रसायन भी इनमें मौजूद नहीं होता है, जो आपकी त्वचा और बालों को हानि पहुंचा सके।
नीम हर भारतीय परिवार में एक प्रकार का घरेलू पौधा है। लेकिन आज के दिनो में इन पौधों के छोटे फूल वाले पौधों उग रहे हैं और नीम के स्थानों मे घरों से गायब होते जा रहे हैं। नीम के पौधों को बढ़ने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है जिससे की यह बड़े रेंज में फैल जाते हैं। नीम का वानस्पतिक नाम आजदिरचता इंडिका है। नीम के पेड़ महोगनी परिवार मेलैसी के अंतर्गत आता है। नीम के पेड़ के मूल भारत, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया और पाकिस्तान में है। नीम मे ग्लूमतिक एसिड, टाइरोसीन, अर्गीनीने, मेथिओनिओन, फेनिलएलनिन, हिस्टडीन, आर्मीनोकपरयलिक एसिड और आइसोलियोकिन अमीनो एसिड मौजूद होता है।
नीम के फायदे, नीम का हर हिस्सा हमारे लिए फायदेमंद है। हम कई तरह से नीम के उपयोग, नीम का पेड़, पत्ते, शाखा, फूल, फल का उपयोग सकते है। पुराने दिनों से नीम बीमारियों आदि के इलाज के लिए आयुर्वेद में प्रयोग किया जाता रहा है। इसमें आजदियारचीन होता है, नीम के फायदे, यह कवक विरोधी, बैक्टीरियल विरोधी और सूजन विरोधी के रूप में काम करता है।नीम का तेल नीम के बीज और नीम के फल से निकाला जाता है। यह नीम का तेल हल्के भूरे रंग, कड़वा स्वाद और सल्फर की तरह गंध वाला होता है है। इसमे से सल्फर की तरह बदबू आती है,क्योकि इस नीम के तेल मे उच्च मात्रा में सल्फर होता है।
नीम तेल के सौंदर्य लाभ
नीम का तेल बालों पर विरोधी कवक और विरोधी बैक्टीरियल के रूप में काम करता है। बालों के लिए इस नीम का तेल का साप्ताह मे एक बार प्रयोग करें। यह तेल गंध में कड़वा है। यह सिर से कवक और जीवाणु को निकाल देता है। अगर आपके सिर की त्वचा संवेदनशील है, तो नारियल तेल या बादाम के तेल के साथ नीम का तेल का उपयोग करे।
नीम का तेल एक्जिमा, दाद, सोरायसिस आदि त्वचा रोगों के इलाज मे मदद करता है। नीम के गुण, नीम के तेल में मौजूद विरोधी कवक और विरोधी बैक्टीरियल गुण त्वचा रोगों के इलाज के लिए मदद करता है, कुछ ही दिनों में परिणाम प्राप्त करने के लिए रोजाना नीम के तेल का उपयोग करें।
नीम से उपचार, नीम का तेल सिर से रूसी निकालने मे मदद करता है। 2-3 सप्ताह तक नीम का तेल का प्रयोग करे। यह तेल बालो को जड़ से मजबूत और घना बनाता है।
नीम के गुण में मुँहासे के लिए नीम का तेल सबसे अच्छा उपाय है। आप इच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए उंगली से मुँहासे पर नीम के तेल को लगाए। नीम का तेल भी काले धब्बे को कम करने मे सहायक है।
नीम का तेल का प्रयोग व्यापक रूप से शैंपू और तेल, साबुन जैसे कई सौंदर्य उत्पादों में उपयोग किया जाता है। नीम के तेल में मिश्रित सल्फर मुँहासे और सोरायसिस के इलाज नीम से उपचार के लिए मदद करता है। नीम का तेल एक्जिमा और खुजली से मुक्त त्वचा पाने के लिए मदद करता है।
मधुमेह से ऐसे पाएं छुटकारा
मधुमेह को अंग्रेजी में डायबिटीज कहा जाता है मधुमेह एक सामान्य बीमारी है लेकिंन एक बार जिसको ये हो जाये तो पीछा छोड़ने का नाम नही लेती, आप अपने जीवन में कुछ बदलाव लाकर इस बीमारी से बच सकते है तो आपको बताते है मधुमेह के घरेलू उपचार के बारे में, जो कि मधुमेह के लिए बहुत ही उपयोगी है
मधुमेह रोगी को अपने खाने पीने का बहुत ही ध्यान रखना चाहिए, समय समय पर डायबिटीज टेस्ट करवाते रहना चाहिए, डॉक्टर सलाह माने तो मधुमेह रोगी हो अपने भूख से थोडा कम खाना चाहिए।
महुमेह के लक्षण
मधुमेह रोगी को अपने खाने पीने का बहुत ही ध्यान रखना चाहिए, समय समय पर डायबिटीज टेस्ट करवाते रहना चाहिए, डॉक्टर सलाह माने तो मधुमेह रोगी हो अपने भूख से थोडा कम खाना चाहिए।
महुमेह के लक्षण
खाना खाने के तुरंत बाद दोबारा भूख लग जाना।
वजन जरूरत से ज्यादा कम होना।
थकान महसूस करना।
लगातार यूरिन (मूत्र) आना।
जरूरत से ज्यादा प्यास लगना।
आँखे कमजोर होना।
घाव जल्दी न भरना।
मधुमेह के घरेलू उपचार।
वजन जरूरत से ज्यादा कम होना।
थकान महसूस करना।
लगातार यूरिन (मूत्र) आना।
जरूरत से ज्यादा प्यास लगना।
आँखे कमजोर होना।
घाव जल्दी न भरना।
मधुमेह के घरेलू उपचार।
मेथी का सेवन करे
मधुमेह रोग के लिए मेथी का सेवन रामबाण सिद्ध होता है अगर आप पचास ग्राम मेथी पूरे दिन में खाएं तो इस बीमारी से निजात पा सकते है और आपका शुगर लेवल भी कम हो जायेगा।
करेला का सेवन करे
डायबिटीज के लिए करेला तो बहुत ही कारगर माना जाता है। एक कच्चा करेला रोज खाएं और यदि आप से कच्चा करेला नही खाया जाता तो करेले का जूस पिए। रोज कम से कम आधा ग्लास, और ऐसा नियमित सेवन करे तो डायबिटीज से मुक्ति पा सकते है और जीवन में आपका शुगर लेवल कम नहीं होगा।
जामुन
जामुन मधुमेह रोग के लिए बहुत ही उपयोगी है और यह बिलकुल जड़ से डायबिटीज को खतम कर देता है। जामुन का रस, पत्ती, बीज को उपयोग में लायें, जामुन के बीजो को सुखाकर और उसका पाउडर बना ले और रोज एक चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें तो मधुमेह रोग से निजात मिलेगी।
आंवला
अगर आप रोज एक चम्मच आंवले के रस को करेले के रस में मिलाकर रोज पियें तो मधुमेह रोग जड़ से खत्म हो जायेगा, और आंवला आसानी से बाजार में उपलब्ध होता है।
आम की पत्ती का सेवन करें
पंद्रह ग्राम आम की पत्ती को रात भर एक पाव पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उठते ही इस पानी को छानकर पियें, इसके आलावा सूखे हुए आम के पत्तियों को पीसकर पाउडर के रूप में इस्तेमाल करें तो लाभ मिलता है।
पानी ज्यादा पियें
मधुमेह रोगी को अधिक से अधिक पानी का सेवन करना चाहिए और यदि वह नींबू पानी का सेवन करे तो मधुमेह रोगी के सेहत के लये बहुत ही अच्छा होगा।
तुलसी के ये गुण नहीं जानते होंगे आप
तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल करना बुहत फायदेमंद होता है. घरों में तुलसी का पौधे लगभग हर घर में आसानी से मिल भी जाता है. तुलसी कई रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. जैसे कि:
- तुलसी की चाय बनाकर
- एक कप पानी में पांच से छह तुलसी की पत्तियों को अच्छी तरह उबाल लें. पांच से 10 मिनट तक उबलने के बाद इसे एक कप में छान लें. दिन में दो बार ये चाय पीने से बुखार और सर्दी में राहत मिलेगी. इसके अलावा ये मलेरिया और डेंगू से भी बचाव में सहायक है.
- तुलसी वाला दूध
- अगर बुखार कम नहीं हो रहा है तो तुलसी वाला दूध पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. इसके लिए आधे लीटर दूध में तुलसी की कुछ पत्तियों को और दालचीनी को अच्छी तरह उबाल लें. इसके बाद इसमें ऊपर से थोड़ी सी मात्रा में चीनी मिला लें. इस दूध को पीने से बुखार में आराम मिलेगा. इसके अलावा ये वायरल बुखार में भी फायदेमंद है.
- तुलसी का रस
- तुलसी का रस बच्चों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है. 10 से 15 तुलसी की पत्तियों का रस निकाल लें. हर दो से तीन घंटे में ये रस पीते रहें. इससे बहुत जल्दी फायदा होगा.
ऑपरेशन के जरिए पैदा हुए बच्चे होते हैं मोटे
एक अध्ययन में पता चला है कि ऑपरेशन के जरिए पैदा हुए बच्चों में सामान्य प्रसव की तुलना में मोटापे की संभावना 15 फीसदी अधिक होती है. अध्ययन में यह भी कहा गया है कि यह खतरा वयस्क होने तक बना रहता है.
हारवर्ड में पब्लिक हेल्थ स्कूल के टी.एच. चान स्कूल में सहायक प्रोफेसर जॉर्ज चवारो ने कहा, ‘‘हालांकि सीजेरियन प्रसव कई मामलों में जीवन बचाने की आवश्यक विधि है, लेकिन इसमें मां और नवजात शिशुओं के लिए खतरा है।’’ चवारो ने कहा, ‘‘इस अध्ययन से कई दमदार साक्ष्य मिले हैं कि सीजेरियन प्रसव और बचपन के मोटापे के बीच वास्तव में संबंध है।’’ निष्कर्ष बताते हैं कि परिवार के भीतर सीजेरियन प्रसव से पैदा हुए बच्चों में सामान्य प्रसव से जन्मे अपने भाई-बहनों की तुलना में मोटापे की संभावना 64 फीसदी ज्यादा पाई गई।
चवारो ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है, क्योंकि सिर्फ प्रसव के तरीके के अलावा भाई-बहन के मामले में मोटापे की जोखिम वाले अधिकांश संभावित कारक एक ही तरह की भूमिका में रहते हैं, इसमें आनुवंशिक लक्षण भी शामिल हैं।’’ इसके अलावा ऐसी महिलाएं जो पहले सीजेरियन प्रसव से बच्चे को जन्म दे चुकी थी और फिर इनसे जन्मे सामान्य प्रसव वाले बच्चों में मोटापे के खतरे की संभावना सीजेरियन की तुलना में 31 फीसद कम रही।
ईको एडवेंचर से केरल में पर्यटन को मिला बढ़ावा
केरल सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस साल ईको एडवेंचर कार्यक्रम शुरू किया है औऱ राज्य सरकार की ओर से संचालित कई योजनाओं के चलते केरल मे हर साल पर्यटन में काफी इजाफा हो रहा है. केरल पर्यटन विभाग के मुताबिक, ईको एडवेंचर कार्यक्रम के तहत वन्यजीव, पहाड़ी ठहराव. समुंदर के किनारे पर्यटन गतिविधियां चला कर पर्यटन को बढ़ाया जाता है. इन गतिविधियं के दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होने पर विशेष ध्यान रखा जाता है.
साथ ही वनस्पति और संपन्न प्राकृतिक विरासत को कोई नुकसान होने नहीं दिया जाता है. इस कार्यक्रम में पर्यटकों को ट्रैकिंग, कैंपिंग, रॉक क्लाइंबिंग, जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, कयाकिंग, कैनोईंग और पैराग्लाइडिंग कराई जाती है. पर्यटकों को हर साल कुछ नया चाहिए और इसके लिए केरल में एक नया ब्रांड कैम्पेन विकसित किया जा रहा है. इसे जल्द केरल पर्यटन के अंतर्गत लॉन्च किया जाएगा. इस योजना के तहत राज्य के नए स्थानों को आगे लाया जाएगा और देश के मुख्य स्थानों से चार्टर फ्लाइट्स, चार्टर रेलगाड़ी औऱ रेलगाड़ियों में पर्यटक कोच लगाए जाने की संंभावना है.
लोगों की पसंद बन रहा ‘स्लो ट्रेवल’
हम हमेशा नया ट्रेंड तलाशते रहते हैं. फिर चाहे वो खाना हो, कपड़े हो या फिर घूमना. घूमने में आजकल स्लो ट्रेवल बहुत ट्रेंड कर रहा है. लोग अब रिमोट एरिया में जाना ज्यादा पसंद करते हैं. जहां वो पैदल ही पूरी यात्रा का मजा ले सकते हैं. यहां तक की लोग अब फ्लाइट की जगह ट्रेन का इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते हैं. शायद ये चीज इसलिए भी पसंद की जा रही है, क्योंकि लोग लाइफ का भरपूर मजा लेना चाहते हैं. वो हर चीज करना चाहते हैं जो उस जगह के लोकल लोग करना पसंद करते हैं. जो भी घूमने का प्लान करता है, वो ये ही सोचकर घूमने के लिए जाता है कि वो अपने हर पल को खुशनुमा बना सके. साथ ही हर पल को ऐसे जी सके की आने वाला कुछ समय अच्छे से बीता पाए. स्लो ट्रैवल तो यात्रा के हर क्षण को अपने में कैद कर लेता है. इस भागदौड़ के समय में स्लो ट्रेवल लोगों को ना सिर्फ रिलेक्स करता है बल्कि उन्हें हर पल को जीने का मौका भी देता है. हर किसी के लिए स्लो ट्रेवल का अपना अलग मतलब होता है. किसी के लिए स्लो ट्रेवल का किसी उंची पहाड़ी पर बैठकर किताब पढ़ना होता है. किसी के लिए अपनी पसंदीदा जगह जाकर ध्यान लगाना होता है. कुल मिलकर कुछ अलग करने की चाहत ही लोगों में स्लो ट्रेवल जैसे शब्द को बढ़ावा दे रही है.
बुटीक खोलकर भी की जा सकती है अच्छी कमाई
फैशन का क्रेज तो आजकल हर किसी के अंदर देखने को मिल रहा है. हर कोई फैशन की जानकारी रखना पसंद करता है. अपनी जानकारी बढाने के लिए टीवी देखें, फैशन मैगजीन पढें, बाजार की वैराइटी देखें. इस बिजनैस में आप को ग्राहकों को सीधे डील करना होता है, इसलिए खासतौर से अपनी आउटफिट पर ध्यान दें.
यदि आप आउटडेटेड ड्रैस या बिना फिटिंग के कपडे पहनेंगी तो ग्राहकों पर अच्छ प्रभाव नहीं पडेगा. वहीं स्वर्य तैयार किए हुए डिजाइनरी कपडे पहनेंगी तो ग्राहक उस की तारीफ किए बिना नहीं रहेंगे. बुटीक में दूसरों से अलग करने की खासीयत नहीं होगी. अधिकतम लाभ नहीं कमाया जा सकता.
इसके लिए पार्टी वियर या वैस्टर्न ड्रेसेज की स्टिचिंग या फिर लेडीज वियर में विशेषज्ञता हासिल करें. त्यौहारों में अधिक कार्यभार के चलते आमतौर पर बुटीक में ग्राहकों को इंतजार करना पडता है. आप ग्राहकों को वक्त पर उन की ड्रेसें सिल कर देंगी तो आपके बुटीक की अलग पहचान बनेगी. ग्राहकों को आकर्षित करनके लिए बुटीक के इंटीरियर पर खास ध्यान दें.
साफसफाई बनाए रखने के साथ-साथ सुंदर सुंदर ड्रेसों के पोस्टरों से भी दीवारों को सजाएं. ग्राहकों के बैठने के लिए सोफासैट रखें व बुटीक में ट्रायलरूम जरूर बनाएं.रॉक प्लांटेशन से घर को बनाएं सुंदर
घर में रॉक प्लांटेशन करके बेहद सुंदर बनाया जा सकता है. घर में रॉक प्लांटेशन से जंगल के माहौल जैसा एसास होता है. अगर आपको भी जंगल में रहने का मन है तो आप रॉक प्लांटेशन ट्राई कर सकती हैं. इस प्लांटेशन से बिल्कुल अलग एहसास होता है. आप रंग बिरंगे फुलों का इस्तेमाल कर सकते हैं. जिनका लुक बिल्कुल नैचुरल हो. रॉक प्लांटेशन में चट्टानों के टुकडों में इस तरह के पौधों को प्राथमिकता दी जाती है. जिनकी जडें और पत्तियां पूर्ण रूप से प्राकृतिक वातावरण का एहसास दें. इसके लिए फाइकन, आइसलैंड, जेड अडेनियम, अरेलिया, बोनसाई, बैंबू की मिनी किस्म का मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है. रॉक प्लांटेशन के लिए सबसे पहले चट्टान के टुकडे लिए जाते हैं. ये टुकडे बडी-बडी चट्टानों की प्राकृतिक क्रियाओं से अलग हुए होते हैं. इसे लावा रॉक स्टोन कहते हैं. इन लावा रॉक स्टोन में प्राकृतिक रूप में कई होल हो जाते हैं. रॉक के होल में पौधों की जडों का सेट रोपा जाता है। इसके बाद दोबारा मिट्टी और खाद्य का लेप किया जाता है. पूरी रॉक पर तार से वाइरिंग की जाती है ताकि पौधे सेट हो सकें. इसके बाद धीरे-धीरे पौधों की जडें रॉक के होल्स में फैलकर जगह बना लेती हैं. नमी के लिए इन रॉक्स पर मॉसग्रास लगाई जाती है. इससे आप अपने घर एक अलग लुक देकर बेहतरीन बना सकती हैं. रॉक प्लांटेशन करने के बाद इसकी अच्छे से देखभाल भी करनी चाहिए.
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