आपकी मुस्कान बहुत सी परेशानियों का हल है। आप अगर लड़ते-लड़ते मुस्कुरा दें तो लड़ाई खत्म। परेशानी के मुश्किल दौर में आप किसी की ओर देखकर प्यारी सी मुस्कान दे दें तो परेशानी खत्म। मुस्कान भले किसी मुसीबत का हल नहीं पर उससे निबटने की ताकत जरूर देता है। जब आपकी छोटी सी मुस्कान इतने काम की है तो यह किसी को इंप्रेस करने में भला कैसे पीछे रह सकती है। जब भी उनसे मिलें एक प्यारी सी मुस्कान दें यह आपके रिश्ते को मजबूत देगा. अब आपकी जिंदगी में कोई आ गया है या फिर आप किसी को अपनी जिंदगी में लाना चाहती हैं तो सबसे पहले अपने लुक्स में थोड़ा सा बदलाव करें। अपने आप का नया वर्जन सबके सामने पेश करें, मतलब खुद का मेकओवर करें। अपने ड्रेसिंग में थोड़ा बदलाव करें, आपके चेहरे को जंचता हुआ हेयरस्टाइल लें और अपने आपको एक स्टैंडर्ड लुक दें। यह बात तो कई स्टडीज में उजागर हो चुकी है कि मर्द सबसे पहले महिलाओं के स्तनों की तरफ देखते हैं या फिर यूं कहें कि महिला के स्तन ही मर्दों को सबसे पहले अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ऐसे में थोड़ा डीपनेक टॉप्स पहनना शुरू करें लेकिन ध्यान रहे कि वो ज्यादा डीपनेक न हों। अपने शरीर के उभार को एलीगेंट तरीके से शोऑफ करें ताकि वो आपके लिए एक स्टेटमेंट बन जाए।
आपकी अपनी सहेली
Wednesday, 28 September 2016
Friday, 23 September 2016
गर्भवती महिलाओं में खून की कमी के मामले घटे !
एक दशक बाद साल 2015 में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। लेकिन यह भी सच्चाई है कि अन्य देशों की अपेक्षा और वैश्विक औसत दर की तुलना में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या भारत में ज्यादा है। साल 2015-16 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के लिए 14 राज्यों के सर्वे दर्शाते हैं कि एक दशक पहले रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या 57 प्रतिशत थी, जो घटकर 45 प्रतिशत हो गई।इंडिया स्पेंड विश्लेषण के एनएफएचएस-4 आंकड़े के अनुसार, रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं (15 से 49 वर्ष) की संख्या में कमी का संबंध स्वच्छता और महिलाओं की शिक्षा में सुधार से है। रक्तहीनता से पीड़ित महिला के मरने या उनके द्वारा सामान्य से कम वजन के बच्चे को जन्म देने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही नवजात शिशु की मृत्यु की आशंका भी बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2011 में भारत में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाएं 54 प्रतिशत थीं। इस मामले में भारत की स्थिति पाकिस्तान (50 प्रतिशत), बांग्लादेश (48 प्रतिशत), नेपाल (44 प्रतिशत), थाईलैंड (30 प्रतिशत), ईरान (26 प्रतिशत), श्रीलंका (25 प्रतिशत) से भी बदतर थी। ये आंकड़े सुझाते हैं कि साल 2015 में पड़ोसी देशों, सापेक्षिक रूप से गरीब देशों की तुलना में भी भारत की स्थिति खराब थी। 14 राज्यों में रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की संख्या में सर्वाधिक कमी पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में देखी गई जो 39 प्रतिशत थी। इस राज्य में अब ऐसी महिलाएं सिर्फ 24 प्रतिशत हैं। बेहतर स्वच्छता के उपयोग मामले भी सिक्किम साल 2014-15 में देश में तीसरे स्थान पर था। बताया जाता है कि साल 2005-06 से 2014-15 के दौरान महिला साक्षरता में वृद्धि के मामले में भी सिक्किम दूसरे स्थान पर था। एनएफएचएस-4 के आंकड़ों के अनुसार, रक्तहीनता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं का सबसे अधिक अनुपात 58 प्रतिशत पूर्वी राज्य बिहार में था, जहां सबसे कम महिला साक्षरता दर है और बेहतर स्वच्छता का उपयोग भी सबसे कम होता है। बिहार में एक दशक के दौरान रक्तहीन, गर्भवती महिलाओं की संख्या में केवल दो प्रतिशत की ही कमी हुई। साल 2005 में इस मामले में बिहार से उपर केवल पांच राज्य थे। रक्तहीन गर्भवती महिलाओं की संख्या के मामले में बिहार के बाद मध्य प्रदेश और हरियाणा दोनों 55 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं। दूसरी ओर सिक्किम के बाद मणिपुर (26 प्रतिशत) और गोवा (27 प्रतिशत) का स्थान आता है। बिहार में 25 प्रतिशत परिवार ही बेहतर स्वच्छता का उपयोग करते हैं। इस मामले में विगत एक दशक में बिहार में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन यह सभी राज्यों की तुलना में सबसे कम है। 14 राज्यों में इस मामले में औसत वृद्धि दर 20 प्रतिशत थी। बिहार के बाद मध्य प्रदेश का स्थान है जहां 34 प्रतिशत परिवार बेहतर स्वच्छता का उपयोग कर रहे हैं और बेहतर स्वच्छता के उपयोग करने वाले 48 प्रतिशत परिवारों के साथ असम बदतर राज्यों की सूची में तीसरे स्थान पर है। जबकि सिक्किम में 88 प्रतिशत परिवार बेहतर स्वच्छता का उपयोग करते हैं। इस मामले में हरियाणा में सर्वाधिक 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देश में महिला साक्षरता दर 76 प्रतिशत है और 14 राज्यों में सर्वे के दौरान पाया गया कि विगत एक दशक में इन राज्यों में महिला साक्षरता दर में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई.बिहार में महिला साक्षरता दर 50 प्रतिशत है और एक दशक में इस दर वहां 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मध्य प्रदेश में महिला साक्षरता दर 59 प्रतिशत है और एक दशक में इस दर में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो हरियाणा के साथ सबसे बड़ी वृद्धि है। उधर, अब गोवा में महिला साक्षरता दर 89 प्रतिशत है और इसके बाद सिक्किम (87 प्रतिशत) और मणिपुर (85 प्रतिशत) का स्थान आता है।भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अतिथि शोधकर्ता डायने कोफे के अनुसार, परिवार में अपने लिए खड़ा होने में शिक्षा महिलाओं को मदद कर सकती है। वह गर्भावस्था के दौरान अच्छे भोजन की मांग कर सकती हैं, जिससे रक्तहीनता कमी दूर होगी।
Thursday, 22 September 2016
दही के इन गुणों को जानें
आप अपने खाने में दही का सेवन तो करते ही होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दही हमारे के लिए कितनी लाभकारी है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो हमें सुंदर, ताकतवर और रोग मुक्त बनाता है. दही खाने से पेट की गर्मी दूर होती है. दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है. पेट में गड़बड़ होने पर दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने या चावल में दही मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं. पेट के अन्य रोगों में दही को सेंधा नमक के साथ लेना फायदेमंद होता है. अमेरिकी आहार विशेषज्ञों के अनुसार दही का नियमित सेवन करने से आंतों के रोग और पेट संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं. दही में दिल के रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की गजब की क्षमता है. यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखता है.
दही का नियमित सेवन शरीर के लिए अमृत के समान माना गया है. यह खून की कमी और कमजोरी दूर करता है। दूध जब दही का रूप ले लेता है. तब उसकी शर्करा अम्ल में बदल जाती है. इससे पाचन में मदद मिलती है. जिन लोगों को भूख कम लगती है. उन लोगों को दही बहुत फायदा करता है. बवासीर रोग से पीड़ित रोगियों को दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीने से फायदा मिलता है. हींग का छौंक लगाकर दही खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है. दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है. यह हड्डियों के विकास में सहायक होता है. साथ ही, दांतों और नाखूनों को भी मजबूत बनाता है. इससे मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में मदद मिलती है.
Monday, 19 September 2016
चोकर नेकलेस बना लड़कियों की पहली पसंद
गर्ल्स सबसे अलग लगने के लिए आजकल तरह-तरह की एक्सेसरी को अपने स्टाइल में शामिल कर रही हैं. इस सीजन में चोकर नेकलेस ट्रेंड में हैं. बॉलीवुड से लेकर आम लड़कियों तक चोकर नेकलेस पहली पसंद बनता जा रहा है. हाल ही में दीपिका पादुकोण, ईशा गुप्ता, अमृता राव को रैंप शो और इंस्ट्राग्राम पर इस चोकर नेकलेस में देखा गया. चोकर नेकलेस 70 के दशक में काफी फैशन में था. चोकर से आपकी सुंदरता दो गुना और बढ़ जाती है.
चोकर को आप हर ड्रेस के साथ टीमअप कर सकती हैं. 200 रुपए से लेकर लाखों के डायमंड चोकर मार्केट में अवेलेबल हैं. ये नेकलेस किसी भी ड्रेस के साथ पहना जा सकता है, और हर ड्रेस के साथ खुब फबता भी है. सबसे खास कि इसे पहनकर साधारण साड़ी को भी हॉट बनाया जा सकता है. सलवार के साथ भी पहन सकती हैं. यदि फंक्शन में आप प्लेन शिफॉन साड़ी के साथ कलरफुल चोकर पहनेंगी, तो पार्टी में चार चांद लग जाएगा. इसलिए चोकर नेकलेस को अपनी एक्सेसरी में शामिल करें, और अपने नए स्टाइल से सभी को चौंका दें.
घर पर ही निखारें अपनी त्वचा
जरूरी नहीं है कि सुंदर त्वचा चाहिए तो आपको पार्लर ही जाना पड़ेगा. आप घर पर भी सुंदर और मुलायम त्वचा पा सकते हैं. अगर आप ही इन कुछ उपायों को घर पर ही कर लें तो आप भी आसानी से सुंदर दिख सकती हैं.
- पुदीने की कुछ पत्तियों को पानी में पीसकर सोने से पहले रोज रात में लगाएं.
- रात को आंखों को धोकर सोने के समय आंखों में गुलाब जल डालें इससे आप नींद का पूरा फायदा उठा पायेंगी और आपकी आंखों में चमक हमेशा बनी रहेगी.
- स्किन के अनुसार आप घरेलू पैक बनाएं जैसे- 4-5 स्ट्राबेरी को कद्दूकस करके एक बडे चम्मच स्टार्च के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं, इससे शुष्क स्किन में जान आ जाएगी.
- नींबू के छिलके को आप नाखूनों को अच्छे से साफ कर सकती हैं.
- एक बडे चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक बडा चम्मच पुदीने का चूर्ण व दही मिलाकर अच्छी तरह से फेंट लें फिर इसे आधे घण्टे के लिए रख दें और 15 मिनट तक चेहरे पर लगाए रखें. सूखने के बाद हल्के गर्म पानी से धो लें। सूखी स्किन को राहत मिलेगी.
- दो चम्मच मुलतानी मिट्टी, एक चम्मच कच्चा दूध, एक चम्मच गुलाबजल तथा एक चम्मच नारियल का पानी- इन सबको मिलाकर सांवली गर्दन पर लगाएं। 15 मिनट बाद ठंडे पानी से साफ कर लें.
- स्किन की खूबसूरती के लिए विटामिनए तथा सी युक्त डाइट लें.
ग्रीन टी को दिनचर्या में जरूर करें शामिल
अगर एक्सरसाइज और वर्कआउट से भी आपका वजन कम नहीं हो रहा है. तो ग्रीन टी आपके लिए एक बेहतर उपाय है. यहां तक की आजकल लोगों के जीवन में ऐसे कई कारण हैं जिससे तनाव हो ही जाता है. लेकिन इसे अनदेखा करना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को पैदा कर सकता है. इसलिए तनाव को कम करना बहुत जरूरी है. एक नए शोध के अनुसार तनाव के स्तर को कम करने में ग्रीन टी आपके लिए मददगार हो सकती है.
अगर आप सिगरेट पीने की लत से छुटकारा चाहते हैं तो भी आपको ग्रीन टी पीजिए. एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार ग्रीन टी में मौजूद तत्व निकोटीन की लत छुड़ाने में मदद करते हैं. चीन की पत्रिका साइंस चाइना लाइफ में ए रेवोल्यूशनरी अप्रोज फॉर दे सिसेशन ऑफ स्मोकिंग शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने निकोटीन की तलब को शांत करने के लिए ग्रीन टी के तत्वों को मिलाकर एक सिगरेट का निर्माण किया.
कैंसर का खतरा भी होता है कम
ग्रीन टी में बहुत से औषधीय गुण होते हैं और यह बहुत से एशियन समुदायों में पीढ़ियों से जानी जाती है. हाल में ऐसा पता चला है कि ग्रीन टी का सेवन करने से कैंसर जैसी भयावह बीमारी से भी बचा जा सकता है. पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खाद्य वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीन टी में पाया जाने वाला एक तत्व ऐसी प्रक्रिया को शुरू करने में सक्षम है जो स्वस्थ कोशिकाओं को छोड़कर कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारती है. ग्रीन टी में पाये जाने वाले एपिगैलोकेटचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी) में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने की क्षमता होती है.
ज्यादा से सेवन से हो सकता है नुकसान
ज्यादातर लोग ग्रीन टी को सेहत के लिहाज से काफी फायदेमंद मानते हैं.इसलिए वे दिन भर में कई बार ग्रीन टी की चुस्कियां लेते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं ग्रीन टी का ज्यादा सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है. कई बार अच्छी चीजों को ज्यादा सेवन सेहत बिगाड़ सकता है. दिन भर में पांच से छह कप ग्रीन टी का सेवन परेशानियों को कारण बन सकता है. ग्रीन टी में कैफीन होता है इसलिए इसे ज्यादा पीने से स्लीपींग डिस्आडर्र की समस्या हो सकती है. ग्रीन टी वजन कम करने में सहायक मानी जाती है इसलिए लोगों को लगता है कि ग्रीन टी के ज्यादा पीने से उनका वजन जल्द से जल्द कम हो जाएगा जो कि पूरी तरह से गलत है.
ब्रेकफास्ट में इन चीजों से लें ब्रेक
वैसे तो कहा जाता है कि सुबह का नाश्ता भर पेट करना चाहिए, ये सच भी है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप पेट भरने के लिए कुछ भी खा लें. नाश्ते में हमें हेल्दी चीजों का ही सेवन करना चाहिए. हम अपनी इस रिपोर्ट में आपको बता रहे हैं कि आपको किन चीजों से नाश्ते में बचना चाहिए क्योंकि ये चीजें आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं.
ब्रेड बटर- ये जल्दी बनने वाला ब्रेकफास्ट है। जो पांच मिनट में तैयार हो जाता है, लेकिन बटर में नमक की अधिक मात्रा होती है जो हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता।
मैग्गी- 10 मिनट में बनने वाली मैग्गी अस्वस्थ फूड है। सुबह नाश्ते में मैग्गी स्वास्थय पर बुरा प्रभाव डालती है। इसमें कोई भी नेचुरल चीज नहीं डली होती।
कचौरी- कचौरी सुबह नाश्ते में खानी नहीं चाहिए। तेल में तली कचौरी और इसमें मसाला भी भरा जाता है, जो सेहत के लिए सही नहीं होता।
वड़ा पाव- वड़ा पाव मुंबई का फेमस फास्टफूड है। वड़ा पाव को लोग नाश्ते में खाना पसंद करते हैं, जो स्वास्थ्य पर असर डालता है।
पराठा- पराठ नॉर्थ इंडियन फेमस फूड है। जो लोग सुबह के समय दही के साथ पराठा खाना पसंद करते हैं। फैट को बढ़ाता है, जो शरीर के लिए सही नहीं होता।
साबूदाना वड़ा- ये भारतीय लोगो के बीच बहुत किया जाता है, तेल में तले साबूदाना वड़ा सुबह ब्रेकफास्ट में खाना शरीर को हानि पहुंचाता है।
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